शीर्षक-अभी जारी है

शीर्षक-अभी जारी है
अपने सपनो के देश को
बदलने की तेयारी अभी जारी है
वो जो हुक्मरान बैठे है सिहांसन पर
यही तो दिलासा दे रहे है
नोटबंदी करवा कर
भारत को कतारों में लगा कर
दूर करी बेकारी है

अपने सपनो के देश को
बदलने की तेयारी अभी जारी है
वो जो संसद में बैठते है
अरे वही जिसे हमने ही चुनाव में जीताया है
यही तो कह रहे हैं
इंडिया उनके कहने से ही तो स्टैंड अप कर रही है
काला धन को सिट डाउन करने के बहाने
हर रोज गाते हैं नए नए अफ़साने

अपने सपनो के देश को
बदलने की तेयारी अभी जारी है
वो जो रेडियो पर आते रहते है गाहे बगाहे
अपने मन की बात करने
यही तो दिलासा दे रहे है
देश को बदलने के लिए
अभी हाल ही में जी एस टी का झुनझुना थमाए है
जनता को फिर से भरमाये है

अपने सपनो के देश को
बदलने की तेयारी अभी जारी है
गरीबी,भुकमरी बेरोजगारी लाईलाज बिमारी है
ये किस्से है चुनाव के
जुमले है चुनावी मौसम के
इसे रहने दीजिये
जनता को वोट देने की बिमारी है
सरकारों के भरोसे रहने की लाचारी है
—————————-अभिषेक राजहंस

5 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 23/11/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 23/11/2017
  3. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 23/11/2017
  4. Kajalsoni 24/11/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/11/2017

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