दूर रह कर हमेशा हुए फासले

दूर रह कर हमेशा हुए फासले ,चाहें रिश्तें कितने क़रीबी क्यों ना हों
कर लिए बहुत काम लेन देन के ,विन मतलब कभी तो जाया करो

पद पैसे की इच्छा बुरी तो नहीं मार डालो जमीर कहाँ ये सही
जैसा देखेंगे बच्चे वही सीखेंगें ,पैर अपने माँ बाप के भी दबाया करो

काला कौआ भी है काली कोयल भी है ,कोयल सभी को भाती क्यों है
सुकूँ दे चैन दे दिल को ,अपने मुहँ में ऐसे ही अल्फ़ाज़ लाया करो

जब सँघर्ष है तब ही मँजिल मिले ,सब कुछ सुबिधा नहीं यार जीबन में है
जिस गली जिस शहर में चला सीखना , दर्द उसके मिटाने भी जाया करो

यार जो भी करो तुम सँभल करो , सर उठे गर्व से ना झुके शर्म से
वक़्त रुकता है किसके लिए ये “मदन” वक़्त ऐसे ही अपना ना जाया करो

मदन मोहन सक्सेना

5 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/11/2017
  2. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 22/11/2017
  3. Kajalsoni 24/11/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/11/2017

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