लकीर के फकीर — डी के निवातिया

लकीर के फकीर

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अब से अच्छा तो, कल परसो का बीता जमाना था
अनपढ़, लाचारी में, लकीर के फकीर बन जाना था
क्या हुआ, पढ़-लिखकर, चाँद या मंगल पर बैठने से
जब होकर सभ्य,शिक्षित, यूँ अज्ञानी बन जाना था !!

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डी के निवातिया

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12 Comments

  1. Kajalsoni 21/11/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/12/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/11/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/12/2017
  3. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 22/11/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/12/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 23/11/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/12/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/11/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/12/2017
  6. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 25/11/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/12/2017

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