काली -स्याह सर्द रातों में ,,,,

काली – स्याह सर्द रातों में
तन्हाई में लिपटी तेरी यादों से
गुमसुम -सी खामोश खड़ी मैं
बातें करती तेरी बातों से
काली -स्याह सर्द रातों में ,,,,,,,,,

बूँद -बूँद है नीर नयन में
आकुलता है व्याकुल मन में
तुम दूर गए हो जब से साजन
हैं प्राण नहीं अब इस तन में
एक बार सही पर आ जाओ
तुम मिलने मुझसे ख़्वाबों में
काली -स्याह सर्द रातों में ,,,,,,,

पगली पवन जब छूकर गुजरे
रोम – रोम यूँ सिहर उठे ,
नीर भरे दो नयन कलश
तेरी यादों से यूँ छलक उठे,
तेरे प्यार की निर्मल सरिता
बह उठती है मेरी आँखों से ,
काली -स्याह सर्द रातों में ,,,,,

मेरी रातों की खामोशी में
दिल का तुम संगीत बनो
मत दूर रहो अब मुझसे तुम
जीवन की सच्ची प्रीत बनो
रोम -रोम में बस जाओ तुम
महक उठो मेरी साँसों से
काली -स्याह सर्द रातों में
तन्हाई में लिपटी तेरी यादों से ,,,।

सीमा “अपराजिता “

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/11/2017
  2. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 20/11/2017
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/11/2017
  4. Kajalsoni 20/11/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/11/2017

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