रिश्तों का तानाबाना – अनु महेश्वरी

बचपन से बुढ़ापे तक के सफर में,
रिश्तों का तानाबाना बुनते बुनते,
हम एक जाल सा बुन तो लेते है,
पर ज़िन्दगी के अंतिम पड़ाव में,
कुछ, साथ छोड़ चुके होते,
कुछ, साथ रहना नहीं चाहते,
और बहुत सारे रिश्ते, होते हुए भी,
रह जाती, फिर ज़िन्दगी, तन्हा सी,
गुजार रहे होते है, बस समय ही,
अकेले, अकेले, बस इंतजार में…

 

अनु महेश्वरी
चेन्नई

9 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 15/11/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/11/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/11/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/11/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/11/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/11/2017
  4. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 16/11/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/11/2017
  5. Kajalsoni 19/11/2017

Leave a Reply