बदलता देखा जमाना री माँ

कुछ टेम माड़ा था
कुछ किस्मत थी माड़ी री माँ
पैसे के चक्कर में
या दुनिया होगी
न्यारी री माँ
गाव बदल गए शहरो में
बदल गए रिश्ते नाते री माँ
बेटा बेरी होगा बाप का
कागज के टुकड़े के लिए
कर दे कत्ल भाई का
पत्नी दे जा धोखा पति को
आकर बातो में गैरो के
उजड़ते देखे आशियाने
अपनो के हाथो से री माँ
लाज बेचीं बेचीं दी सच्च
बीच बाजारों में री माँ
सत्यवादी ठोकर खावे घर घर
राज आ गया पापी का
लुटेरे ग़ुम रहे समाज में
ओढ़ चोला साधु का
अपना पराया देखे न
ये काम करे गंदगी का
इस समाज में क्योंकर
जी लू री माँ
यूँ खेल गंदगी का
अमन ना खेला जाए

10 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 12/11/2017
    • Aman Nain Aman Nain 12/11/2017
  2. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 12/11/2017
    • Aman Nain Aman Nain 12/11/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/11/2017
    • Aman Nain Aman Nain 12/11/2017
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/11/2017
    • Aman Nain Aman Nain 13/11/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/11/2017
    • Aman Nain Aman Nain 13/11/2017

Leave a Reply