सपनों का टुटना

मैंने अपने सपनों को टुटते देखा है

मैंने अपने अरमानों को कुचलते देखा है।

ख्वाहिश नहीं थी मुझे

किसी राजधराने की बहुँ बनु।

ख्वाहिश नहीं थी मुझे

किसी जमींदार की जीवनसंगिनी बनु।

बस अपने सपनों में इतना देखा था मैने

सपनों को पूरा करने वाला हमसफर मिले।

जितने मेरे सपने टुटे है

जितनी मेरे अरमान कुचले है

उतनी रातें सिसक चुकी हुँ।

उतने ही आंसू बह चुके है।

अब न आँखों में आँसू बचा है

न तो अब अरमान बचा है।

न तो कोई सपना बचा है

न तो कोई मंजिल बचा है।

बस अब इतनी ही ख्वाहिश बची है।

मौत आए मुझको उससे पहले

जो मेरा हमसफर बना है।

 

 

9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/11/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 11/11/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 11/11/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 11/11/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/11/2017
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 12/11/2017
  5. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 12/11/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/11/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/11/2017

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