कुछ ख़ास हो जाये

कुछ रूप सुहाने हैं
जो बनाये बढ़ी ही फुरसत से
अगर हमें भी छु ले
तो हम भी ख़ास हो जाये

कुछ दिल के पास हैं
जो गाये गीत मोहब्बत के
अगर हम पे कोई गीत बनाएं
तो ये शाम भी ख़ास हो जाए

कुछ बारिश की बुँदे हो
जो मिट्टी को महकाये
अगर तुम जो साथ हो
तो ये मौसम भी ख़ास हो जाए

कुछ प्रेम की कविता हो
जो दो दिलों को मिलादे
अगर प्रीत ने गाई हो
तो ये गीत भी ख़ास हो जाए

कुछ ढून्ढ रहे हैं आज भी
जो मिलता नहीं है बाहर क्यों
अगर कोई अंदर का राह दिखाए
तो ये ज़िन्दगी भी ख़ास हो जाए

3 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 05/11/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/11/2017
  3. डी. के. निवातिया Dknivatiya 06/11/2017

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