ज़िन्दगी का शायर हूँ..

ज़िन्दगी का शायर हूँ

मैं ज़िन्दगी का शायर हूँ, मौत से क्या मतलब
मौत की मर्जी है, आज आये, कल आये|

टूट रहे हैं, सारे फैलाए भरम ‘हाकिम’ के,
‘हाकिम’ को चाहे यह बात, समझ आये न आये|

वो ‘इंसा’ गजब ‘वाचाल’ निकला
‘बात’ उसकी, किसी को समझ न आये|

‘आधार’ जरुरी है ‘जीवन’ के लिये
‘आधार’ बिना रोटी नहीं, इंसा जी पाये न जी पाये|

गाफिल रहे, जिन्दगी खुशनुमा बनाने ‘रदीफ़-काफिये’ मिलाते रहे
जिन्दगी की ‘गजल’ लय-ताल से नहीं चलती, समझ न पाये|

अरुण कान्त शुक्ला, 6/11/2017

10 Comments

  1. chandramohan kisku chandramohan kisku 06/11/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/11/2017
    • Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 06/11/2017
    • Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 06/11/2017
      • C.M. Sharma C.M. Sharma 07/11/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 06/11/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 06/11/2017
  5. डी. के. निवातिया Dknivatiya 06/11/2017
  6. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 10/11/2017
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/11/2017

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