शहर की रौनक…

जब शहर कि रौनक को गाँव की खिड़की से देखता हूँ,
एक बूढी औरत मेरे उतारे हुए पुराने दिन पहनकर अपना हर रोज़ काट रही है।

nitesh banafer (kumar aditya).

8 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 03/11/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/11/2017
  3. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 04/11/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 04/11/2017

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