दिल की आग-बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

आग दिल में हम लगाये हुए हैं
चोट पत्थर का ही खाये हुए हैं।

हमें अपनो ने मारा है भरदम
अपने किस्मत से हारे हुए हैं।

जबसे खाये मुहब्बत में धोखे
उन्हें दिल से ही हटाये हुए हैं।

इस जमाने में जीने हैं मुश्किल
शैतान बनके जो छाये हुए हैं।

मुझको लूटा है सूरत तुम्हारी
उनको नजरों में छुपाये हुए हैं।

नहीं था मंजूर रब को ऐ बिन्दु
कितने जहमत हम उठाये हुए हैं।

7 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 03/11/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 03/11/2017
  3. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 03/11/2017
  4. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 03/11/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/11/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 04/11/2017
  7. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 04/11/2017

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