प्रेम नगरी

 

बीती रात हुआ सवेरा प्यार की आहें और भरी
डग मग डग मग डरे पाव से पहुँच गया मैं प्रेम नगरी
उसकी सूरत ही सब कुछ देख जिसे मैं चहक उठा
मौन हो गया देख उसे और मेरी नजरे भी ठहरी

 

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

8 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 30/10/2017
  2. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 30/10/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/10/2017
  4. kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 31/10/2017

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