कली ये प्रेम की – शिशिर मधुकर

रिश्तों की खातिर अक्सर मुहब्बत छूट जाती है
अगर कमज़ोर हो धागा तो माला टूट जाती है

कोई भी जान कर इस खेल में शामिल नहीं होता
कली ये प्रेम की खुद से ही अक्सर फूट जाती है

बड़े पहरे लगाए दिल में कोई दर्द ना भर दे
मधुर मुस्कान फिर भी चुप से आके लूट जाती है

अगर सच को पढ़ना है कोई आँखों में पढ़ ले
जुबां तो महफिलों में कह के अक्सर झूट जाती है

मधुकर मुहब्बत में कभी बदले नहीं होते
बड़े हँसते हुए ये पी के बिष के घूंट जाती है

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 30/10/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/10/2017
  2. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 30/10/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/10/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/10/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/10/2017
  4. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 30/10/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/10/2017
  5. kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 31/10/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/10/2017
  6. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 31/10/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/10/2017
  7. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 01/11/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/11/2017

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