जज्बातों के दरीचे

छुपाकर आँखों से रूह के दरीचे पे एक ज़ज्बात रखा था।
नाजुक ही सही,पर शख्शियत का तेरी उसमें पूरा हिसाब रखा था।।

 

3 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 26/10/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 27/10/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017

Leave a Reply