वज़ह — डी के निवातिया

वज़ह

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बिना वज़ह ये सुबह शाम नहीं होती
हर एक शै: जग में आम नहीं होती !
जी लो हर एक पल को फिर हो न हो
जिंदगी किसी की गुलाम नहीं होती !!

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डी के निवातिया

 

12 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 24/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/10/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/10/2017
  3. md. juber husain md. juber husain 25/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/10/2017
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/10/2017
  5. Kajalsoni 25/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/10/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 25/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/10/2017

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