मेरी इबादत

 

तू ही चाहत तू ही राहत तू ही मेरी आदत है
कैसे तुझको में भूल जाऊं मुझे याद तेरी हर आहट है
पल भर को देखा था तुझको आज मेरी ये हालत है
अब और नही कुछ चाहिये बस तू ही मेरी इबादत है

 

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

8 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/10/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/10/2017
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/10/2017
  4. Kajalsoni 25/10/2017

Leave a Reply