सपनों की महक

सपनों की महक

 

फूल  की गंध कभी भटकती नहीं है

सपनों की महक कभी दबती नहीं है।

 

नींद करवटें चाहे बदला करे

अचेतन हो नयन भी सोया करे।

स्वच्छ चंचल चाँदनी-सी रात में

मायूस मन भी भ्रमण करता रहे।

 

महक सपनों की कभी मिटती नहीं है।

 

फूल  की गंध कभी भटकती नहीं है

सपनों की महक कभी दबती नहीं है।

 

अश्रू चाहे जितना श्रंगार कर ले

घूँघट पलक के हटा रोया करे।

या धधकता हृदय अंगार बनकर

राख का कफन ओढ़े सिसका करे।

 

पर स्वप्न-जागी आस मिटती नहीं है।

 

फूल  की गंध कभी भटकती नहीं है

सपनों की महक कभी दबती नहीं है।

 

देता प्रकाश जो जग को निरंतर

वह चिराग आंधी से डरता नहीं।

रहे चेतना सजग जिसकी अविरल

वह पथिक बन राह में थकता नहीं।

 

स्वप्न में भी जिन्दगी थमती नहीं है।

 

फूल  की गंध कभी भटकती नहीं है

सपनों की महक कभी दबती नहीं है।

 

स्वप्न की पहचान जो चाहे करो

सत्य असत्य, शुभ अशुभ जो भी कहो

पर उसे साकार करता कौन है

है कहाँ ये हौसला जग में कहो?

 

हर मृग में कस्तूरी मिलती नहीं है।

 

फूल  की गंध कभी भटकती नहीं है

सपनों की महक कभी दबती नहीं है।

 

… भूपेन्द्र कुमार दवे

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5 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/10/2017
  2. hitishere hitishere 21/10/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/10/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 22/10/2017
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 23/10/2017

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