तू चाहत है

तू चाहत है

कैसे बताऊ मैं तुझे
आँखें तेरी कमाल है
यूँ तुम्हारे हँसने से
हूए हम बेहाल है
खामियाँ तो सौ हैं हममे
पर इस बात की भी राहत है
तू चाहत है

ये चहरे की मासूमियत
वो सर झुकाने की लत
ये तुम्हारे नाजुक हाथ
हर पल दिल को देते मात
डरना तो खैर तुम्हारी आदत है
पर इस खता की भी राहत है
क्योंकि तू चाहत है

चलने की तुम्हारी अलग ही अदा है
उसे देख ही तो तुमपे हूए हम फ़िदा है
तू जान भी मागे तो तैयार है
आखिर इधर भी तो चार है
मगर देने से किया इनकार है
क्योंकि हमारी हर एक साँस से
होती इस वतन की इबादत है
और तू है ही क्या , तू………
सिर्फ चाहत है |

जय हिंद

द्वारा – मोहित सिंह चाहर ‘हित’

5 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/10/2017
  2. hitishere hitishere 21/10/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/10/2017
  4. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 22/10/2017
    • hitishere Mohit Chahar 24/10/2017

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