मेरे दरवाज़े की उम्र हो चली है ….


मेरे घर में सिसकते इस पुराने दरवाज़े की अब उम्र हो चली है,
अपनी हर आख़िरी साँसों की एवज में ये टूटते बिखर रहे हैं.
ये चौखट भी अब इस बूढ़े दरवाज़े के कदमों को सम्हालने से कतराते हैं,
कहते हैं इस जख्मी दरवाज़े को अब मरम्मत की जरुरत है,
पर शायद वो ये नहीं जानते कि ये टूटता दरवाज़ा आज भी सिर्फ तुम्हारे आने का इंतजार कर रहा है.

नितेश बनाफर (कुमार आदित्य)

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/10/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/10/2017

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