मैं लौट आऊँगा

शीर्षक –मैं लौट आऊँगा
मैं रेत पे खींची लकीर नहीं
जो मिट जाऊँगा
मैं अतीत का वो हिस्सा नहीं
जो दोहराया ना जाऊँगा
मै तुम्हारे आँखों का आँसू नहीं
जो बह जाऊँगा
मेरे बिछड़ जाने का
तुम मलाल मत करना
मिलने की शर्त पे
मैं लौट आऊंगा
रात ढले तुम सजना ,सवरना
मेरा इंतज़ार करना
मैं सुबह बन के गया था जरुर
सांझे ढले आ जाऊँगा
मैं लौट आऊँगा
माथे पे बिंदी लगा लेना
कानो को कर्णफूल से सजा देना
अपनी चूड़ियाँ खनका देना
जिस्म को इत्र से महका लेना
मैं तेरा मांग भरने
सिन्दूर बनके आऊँगा
मैं लौट आऊँगा—अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 20/10/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/10/2017

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