हे प्रभु! क्या इस देह का

हे प्रभु! क्या इस देह का अंतिम समय आ गया है? 
क्या जीवन का झरना थम रहा?
मेरा अहंकार मिटाकर गीतों को गले से लगा ले,
बस यहीं चाह है!
बार-बार तुझे पुकार-पुकार मेरा मन रो देता हैै, 
तेरी झलक तेरे दर्शन के लिए युगों-युगों से प्यासी हैं ये आँखें!

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/10/2017

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