जब तक प्रेम जीवित है

जब तक प्रेम जीवित है यह जीवन का होना अनुभव होता है।
मैने दिन-रात, हर वर्षा और तपती धूप की पथरीली राह पर तुझे देखने की कोशिश की है।
हे प्रिये! अब आँशुओं की धारा शिथिल हो रही।
बस तेरे दर्शन हो सकें कहीं यह स्वप्न अधूरे ही न रह जाएँ।
यह आपूर्ति जीवन और अनेक जन्मों की पूर्ण कर।
मेरे ह्रदय के देवालय का पुष्प उठा ले,
मेरे आत्म गीत तेरे चरणों को स्पर्श करने हेतु गगन का द्वार खोले हैं।
मेरी प्राण सखी! यह कह सकुँ ऐसा वर दे।

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/10/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/10/2017

Leave a Reply