मन का अंधियारा दूर करने

मन का अंधियारा दूर करने

मन का अंधियारा दूर करने
जैसे ही जला लोगे तुम एक दीप
अपने मन में
पहुँच जायेंगी दीप पर्व की शुभकामनाएं
तुम्हारी मुझ तक एक पल में

प्रकाश नहीं देखता किसी की हैसियत
रोशन करता हर कोना एक समान
प्रेम उमड़ना चाहिए
तुम्हारे मन में भी वैसा ही
समझो, सब हैं सिर्फ इंसान

क्यों भेद इतना तुम्हारी
कथनी और करनी में
रावण भी भला था तुमसे
दस मुख और एक बात
नहीं भेद था उसकी कथनी और करनी में

हमें गर्व है अपनी धरोहर पर
हम नहीं इतिहास से शर्मिंदा
पर होंगी, आने वाली पीढ़ियाँ बहुत शर्मिंदा
पढ़ेंगी जब वर्तमान को
होगा जो, उनके लिए तुम्हारा इतिहास

जिसने कहा जब तुमसे
तुम अच्छा बोलते हो
क्या उसने यह नहीं बताया कि
वाचालता, सीमा से परे
मूर्खता का कराती है अहसास

अरुण कान्त शुक्ला, 18/10/2017

6 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  2. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 18/10/2017
  3. डी. के. निवातिया Dknivatiya 19/10/2017
  4. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 20/10/2017
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/10/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/10/2017

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