हृदय मिले तो मिलते

हृदय मिले तो मिलते रहना अच्छा है
वक्त के संग – संग चलते रहना अच्छा है

ग़म का दरिया अगर ज़िन्दगी को समझो
धार के संग – संग बहते रहना अच्छा है

ख़ुदा मदद करता उनकी जो ख़ुद की करते
हिम्मत से ख़ुद बढते रहना अच्छा है

अगर विश्व है, मंदिर-मस्जिद के अधीन
नियमित मंत्रों का जपते रहना अच्छा है

ठीक नहीं नज़रों का फ़ासला ‘तारा’ से
चाँद अंजुरी में उगते रहना अच्छा है

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