मेरी गजल– दर्द- ऐ -गजल भाग 03

मेरी गजल – दर्द ऐ गजल भाग – 03

मैंने प्यार में संभलना सीखा
तेरे इंतज़ार में जीना सीखा
तेरे लिए मरना सीखा
तुमने नजरो से साजिश किया
आग दिल में लगा कर
मुझे राख- राख किया


चाहतो के समन्दर में जो तुमने
तबाही मचायी है
फिजा में शोर हुआ बहुत
आँखे भर-भर आयी है
प्यासा तो था बहुत
तेरे दिए दर्द ने
प्यास और भी बढाई है
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तेरे यादो के दर्द में
आज फिर रात बेजार होगी
नींद के जगह अश्क होंगी
कलम तेरी बेवफाई लिखेगी
ना होश होगा
ना जान होगी
तेरे दर्द से मुर्दों की जान भी हलकान होगी–अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/10/2017
    • Abhishek Rajhans 16/10/2017

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