ओस की बूंदें

जीवन में सुख-दुख हैं
सिर्फ एक समय तक
बदल जाती हैं
परिस्थितियां
ठीक वैसे ही
जैसे भोर में
ओस की बूंदे
चमकती हैं पत्तियों पर
सूर्य के आगमन तक
फिर खो जाती हैं कहीं
तपिश में
फिर से चमकेंगी कल
रात के अंधकार के बाद
-भरतपुरिया

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/10/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 14/10/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/10/2017

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