ठेस — डी के निवातिया

ठेस

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जिसको जितना चाहा उससे उतना दूर हो गये
जब-जब किया हौंसला तब-तब मज़बूर हो गये
उनकी नज़रो ने हमें पत्थर से शीशा बना डाला
   लगी क्या ज़रा सी ठेस टूटकर चकनाचूर हो गये ।।

ΟΟΟ

डी के निवातिया

16 Comments

  1. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 13/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 13/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017
  4. md. juber husain md. juber husain 14/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017
  5. sarvajit singh sarvajit singh 14/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017
  7. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017
  8. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/10/2017

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