आराम बडा़

शरण तेरी जो पाई मैंने
पाया मैंने आराम बड़ा
दामन तेरा जो थामा मैंने
हुआ यह इक काम बड़ा

चलते २ तपती दोपहरी में
मिल जाता है आराम ज़रा
जीवन जैसे कोई मरुस्थल
क्या मैं जानू छोर कहाँ

शरण में तेरी आई अब तो
चिन्ताओं का क्या काम भला
हों राहें लम्बी चाहे जितनी
रहे ज़ुबाँ पे तेरा नाम सदा

सुख में दुख में तेरा सहारा
दे दे चरणों की छाँव ज़रा
चरणों में तेरे प्रभु जी मेरे
मिलता मुझको आराम बडा़

चलती कभी जो गर्म हवाएँ
भिगो दे पल में तू सारी धरा
रिम झिम २ बरसें बूँदे
फिर दे जाएँ वो बडा़ मज़ा

तुम जैसा न जग में कोई
तुम्हारे लिए क्या काम बडा़
तुम बिन जीना कैसा जीना
तेरा जग सारे में नाम बडा़

शरण तेरी जो पाई मैनें
मिला मुझको आराम बडा़

12 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 11/10/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/10/2017
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/10/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/10/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/10/2017
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/10/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/10/2017
  8. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/10/2017
  9. sarvajit singh sarvajit singh 12/10/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/10/2017
  10. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/10/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 12/10/2017

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