अब तो , बस

शीर्षक- अब तो बस
अब तो बस
यही आखिरी चाहत है
ज़िन्दगी की वीरानगियों पर
मौत का जलसा सजाऊँ
रेत में मिल जाऊँ

अब तो बस
यही आखिरी चाहत है
अपने ज़िन्दगी के नाव को
मझधार में डूबाऊँ
रेत में मिल जाऊँ

अब तो बस
यही आखिरी चाहत है
अपनी ज़िन्दगी के दीये को
खुद हीं बुझाऊँ
रेत में मिल जाऊँ

अब तो बस
यही आखिरी चाहत है
अपने कफ़न का इंतजाम
खुद कर जाऊँ
रेत में मिल जाऊँ

अब तो बस
यही आखिरी चाहत है
अपनी चिता में
खुद हीं आग लगाऊँ
रेत में मिल जाऊँ ——-अभिषेक राजहंस

4 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/10/2017
  2. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 10/10/2017
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/10/2017
  4. sarvajit singh sarvajit singh 12/10/2017

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