मनुष्य की पहचान

******मेरी दूसरी रचना–मनुष्य की पहचान******

तुम एक मनुष्य हो
अपनी मनुष्यता को पहचानो
तुम धीर हो
अपनी धीरता को पहचानो
तुम कर्मवीर हो
अपनी कर्मवीरता को पहचानो
तुम प्राणियों में श्रेस्ठ हो
अपनी श्रेसठता को पहचानो
तुम विवेकशील हो
अपनी विवेकशीलता को पहचानो
तुम दयावान हो
अपनी दयालुता को पहचानो
तुम प्रतिभावान हो
अपनी प्रतिभा को पहचानो
तुम प्रखर मस्तिष्क के स्वामी हो
अपने इस गुण को तुम जानो
तुम किसी से कम नहीं
इस बात को तुम जानो—अभिषेक राजहंस

6 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/10/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/10/2017
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/10/2017
  4. sarvajit singh sarvajit singh 12/10/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/10/2017
  6. md. juber husain md. juber husain 13/10/2017

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