सरकार भ्रष्ट नही भ्रष्टाचार के लिए ही सरकार है !!

फिल्म मदारी का ये डायलॉग आज के वर्तमान सरकार य पिछली जितनी भी सरकार हुयी उसमे अधिकांश के लिए ये डायलॉग उपयुक्त बैठता है क्योंकि साफ-सुथरे खादी वस्त्र पहनने से ,सूट बूट पहनने से व्यक्तित्व साफ नही हो जाता ये इस फिल्म में प्रमाणित हुआ है, यूँ तो पिछले कई वर्षो में घोटालों की बढ़ती सूचि से जनता अब आदि हो चुकी है कि सरकार कोई भी आये घोटाला जरुर करेगी और मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला इसमें से एक था !! फेसबुक और व्हाट्सएप्प में कांग्रेस के पापों की लिस्ट दिखाई जाती है और बताया जाता है कि कांग्रेस ने देश बर्बाद कर दिया तो सवाल ये उठता है कि देश की इतनी बढ़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी क्या कमी रह गयी कि इतने पद,मंत्री होने के बावजूद घोटाला होना रुकता नही है !! इसका मतलब कहीं न कहीं गड़बड़ी उस व्यवस्था में है जिसमे जाकर अधिकांश व्यक्ति भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाता है !! अच्छा इस भ्रष्टाचार के कारण को अच्छे से समझते है !! केंद्र सरकार को बस ड्राईवर समझिये और कंडक्टर विपक्षी पार्टी को और ड्राईवर यानि केंद्र सरकार देश चला रहा है और विपक्षी पार्टी का नियंत्रण जनता यानि सवारी पर भी है और ड्राईवर पर भी ! सरकार केंद्र सरकार और विपक्षी पार्टी दोनों के भूमिका से चलता है और इसी तरह बस भी ! ड्राईवर और कंडक्टर की जिम्मेदारी होती है बस की सर्विस करना,कोई कमी हो तो उसे भरना,व्यवस्थित करना इसी प्रकार केंद्र सरकार की भी और विपक्षी पार्टी की भी जिम्मेदारी होती है देश की व्यवस्था को अच्छा और बेहतर बनाने की !! बस ड्राईवर खराब हो य कुछ बस में खराबी हो जाये य स्पीड कम न हो य ब्रेक फेल हो जाये तो सवारी का गुस्सा सीधे ड्राईवर पर जायेगा य वो उससे अधिक प्रश्न-तर्क करेगा सिवाय कंडक्टर के क्योंकि हम ये मान लेते है कि शासन यानि नियंत्रण पूरा उसके हाथ में है पर नियंत्रण कंडक्टर के पास भी होता है जो आम सवारी नही देख पाती ! इसे कोई बस ड्राईवर य कंडक्टर की बिरादरी का ही देख समझ सकता है य वो जो इस व्यवस्था को समझता हो य उसका कोई रिश्ता हो !! अब इसी बस ड्राईवर को केंद्र सरकार से बदल दीजिये और विपक्षी पार्टी को कंडक्टर से ! पूरा माजरा अब समझ आ जाएगा आपको !! देश में बड़े घोटाले य किसी भ्रष्टाचार में सिर्फ केंद्र सरकार नही विपक्षी पार्टी भी उतनी ही भागीदार है क्योंकि दोनों को सामंजस्य स्थापित करके कोई निर्णय लेना होता है तो ऐसे में ये प्रश्न आता है कि साल २०१४ से पहले की सरकार में हुए भ्रष्टाचार की क्या अकेले कांग्रेस ही जिम्मेदार है य अन्य कोई भी ?? य साल २०१४ के बाद हुए भ्रष्टाचार में सिर्फ बीजेपी ही शामिल है य और कोई भी ?? जाहिर सी बात है भागीदारी तो होगी ही !! अब ये मान ही लीजिये की हिन्दुस्तान का उज्जवल भविष्य तभी संभव है जब किसी व्यक्ति के जीवन में कोई सामाजिक समस्या निजी समस्या बन जाये और उसके समाधान के लिए वो हद से ज्यादा कुछ ऐसा कर दे जो इस फिल्म में एक पिता ने अपने पुत्र के दोषियों को पकड़ने के लिए किया !! यहाँ सब अलग अलग पार्टी बनाकर एक और बस चलाने की फ़िराक में है ! जब सड़क यानि व्यवस्था ही खराब होगी तो कैसे कोई ड्राईवर,कंडक्टर सवारी को उसके गंतव्य तक सही सलामत पहुँचाने की जिम्मेदारी ले सकता है !! जनता को चाहिए कि वो आसरा बंद करे और खुद अपनी समस्या के लिए आपस में पंचायत पद्धति को अपनाये !! हम है तो सरकार है और हमसे ही सरकार है न कि हम सरकार से !! जब अनपढ़,हत्यारे,रेपिस्ट सरकार में अपनी जगह बना सकते है तो एक आदर्श पढ़ा-लिखा,समाज का भला करने-चाहने वाला क्यों नही ?? जनता अब वोट न दे क्योंकि हमें ड्राईवर चुनने का अधिकार है बस बदलने,बनाने,सड़क,सही करने का नही !! ये अधिकार तो इन्ही के पास है जिन्हें हम चुन रहे है !! हम खुद अपने शोषण करवाने की गारंटी लेते है खुद के वोट से और यही है हमारी मूर्खता जिसे सरकार जनता का अधिकार कहकर प्रचारित कर रही है !! घमासान तो होगा २०१९ के चुनाव में क्योंकि अब लोकतांत्रिक व्यवस्था के नाम पर जो लुट चोरी-छुपे हो रही है वो जनता महसूस कर चुकी है !! कोशिश करे इस लुट व्यवस्था को समझने की नही तो रोहन आपका बेटा भी हो सकता है !!!!!!!!!

 

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/10/2017

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