ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कुछ और भी वक्त ले लो सुधरने के लिये
मौका निकल जायेगा कुछ करने के लिये।

आप सोचोगे तो देखते रह जाओगे
एक इशारा ही काफी है संहलने के लिये।

घबराओगे तो किस्मत कैसे बदलेगी
गुरू जी के पास वक्त दो समझने के लिये।

मेहनत – ईमानदारी साथ – साथ रखिये
रास्ता आपको मिलेगा चलने के लिये।

हौसला बुलंद तो मंजिल दूर नहीं होती
मौका मत दो “बिन्दु” को अब हंसने के लिये।

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 07/10/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 07/10/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/10/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/10/2017
  6. sarvajit singh sarvajit singh 08/10/2017

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