वायरस – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

जिंदा है
रावण का वायरस
दस अवगुणों वाला दशानन
माथे पर सवार होकर विराजमान है।
वर्षों से आज तलक
उसे जलाया नहीं गया
उसकी ममी आज भी लंका में है
हम पागल
हर वर्ष रावण का पुतला दहन करते हैं
दो दिन याद रखते हैं
और फिर भूल जाते हैं
अगले वर्ष तक
निरंतर यही खेल चलता है
कसमें खाते हैं
शपथ लेकर और फिर दिलाकर
उल्लू बनाते हैं।
वक्त बदल रहा
मौशम बदल रहे
सरकारें बदल रही
हम आप और वो
नहीं बदलते
क्यों कि सब के सब
मकड़ जाल में फंस गये
माया नगरी के उधेड़ बुन में उलझ गये।
सौ में चार वायरस काफी है
बाकी को वो
कुछ नहीं समझता
चैन लेने नहीं देता न देगा।
जलाना है
अपने अंदर के वायरस को जलाओ
पुतला जलाने से कुछ नहीं मिलेगा
लाखों खर्च करो
सब बेकार
ना समाज का भला ना फिर देश का
विकास के लिए विचार किजिये
उसे बदलिये।
सत्यमेव जयते।

17 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 06/10/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 07/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 07/10/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 07/10/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 06/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 07/10/2017
  5. sarvajit singh sarvajit singh 06/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 07/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 07/10/2017
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 07/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 07/10/2017
  7. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/10/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 07/10/2017

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