शरद पूर्णिमा – सोनू सहगम

-: शरद पूर्णिमा :-

आज पूर्ण चन्द्रमा, सोलह कलाओं से युक्त
धरती पर अपनी, अमृत बरसाने आया है
धरा के समीप होगा, दमकते चाँद का
ये सुंदर संजोग, शरद पूर्णिमा कहलाया है

श्री, भू, कीर्ति संपदा, हो सम्मोहन वाणी
लीला, कांति, विद्या, हो सब शक्ति उतकर्षिणी
नीर-क्षीर, विवेक, योग शक्ति हो कर्मण्यता
विनय, सत्य – धारणा, हो अनुग्रह क्षमता

कोजागरी कहूँ या कहूँ इसे पूर्णिमा रास
युग बदला, जब नन्दलाल ने रचाया महारास
आओ करे तैयारी, कोजागौरी लौक्खी आगमन की
सजाऊँ थाल, कलश, कमल, धुर्वा, सिंदूर, धान की

नर- नारी की सब मनोकामना पूर्ण होगी
धृत-खीर के अर्क से, किलकारियों की आस परिपूर्ण होगी
देखने- “कौ जाग्रति” खुद घर विमला आएगी
सबको धन-समृद्धि से सराबोर करने इन्दुशीतला आएगी

* रचनाकार – सोनू सहगम

Sonu Sahgam

Sonu Sahgam

*

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 06/10/2017
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/10/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/10/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/10/2017

Leave a Reply