ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हम भटक गये अपने रास्ते तो क्या हुआ
बदनाम हुए तेरे वास्ते तो क्या हुआ।

इक सुकून तो है कि तुम अब भी सलामत हो
डोली अपने घर उतारते तो क्या हुआ।

इस जमाने से अब डर नहीं लगता मुझको
अपने प्यार को पुकारते तो क्या हुआ।

कसर तलक नहीं छोड़ी जालिम जमानों ने
यादों में उन्हें तलाशते तो क्या हुआ।

अपने दिले दर्द को कम कैसे आंके हम
जुआ “बिन्दु” जीतकर हारते तो क्या हुआ।

7 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 03/10/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/10/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/10/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 03/10/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/10/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/10/2017

Leave a Reply to Shishir "Madhukar" Cancel reply