कविता :– आजादी के दिवाने, कवि :– अमन नैन

अंधकार के युग में उमीद की
एक रौशनी देखी थी
आजादी के दीवानो के सिर
सरफरोजी की तमन्ना को
परवाने चढ़ाते देखा है
अपने खून से माँ के
आँचल को धोते देखा है
हो खुला आसमां अपना
आजादी की धुप से
खिली हो धरती अपनी
ऐसे ख्वाबो को ऊँचाई
अपने जज्बातो से देते देखा है
बन कर चट्टान की तरह
नदियों के मुहाने को
बदलते देखा है
अपनी शरीर की चोटो को
सहलाते हुए अंग्रेजो के ताज को
गिराते हुए देखा है
अपनी जिंदगी से खेल कर
उन्हें देश की आजादी के लिए
भारत माता के चरणों में
अपनी हस्तियों को
मिटाते देखा है
उन शहीदों की यादो को
अमन ने अपनी नम आखो से
अपने शब्दों में उतरा है

10 Comments

    • Aman Nain Aman Nain 03/10/2017
  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 03/10/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/10/2017
    • Aman Nain Aman Nain 04/10/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/10/2017
    • Aman Nain Aman Nain 04/10/2017
  4. Aman Nain Aman Nain 04/10/2017
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/10/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2017

Leave a Reply