मैं रहता कहाँ हूँ

मुझे नहीं पता
मैं रहता कहाँ हूँ
खुद को भुला कर
ढूंडता क्या हूँ
किस्से अपने जज्बातो के
मैं कहता कहाँ हूँ
मैं सुनाता कहाँ हूँ
है दर्द तुमने दिए कितने
सितम ढाए चाहे कितने
मैं तेरी बेवफाई
बताता कहाँ हूँ
जो खाए कसमे
जो निभाए वादे
मैं तोड़ता कहाँ हूँ
जख्म -ए -निशां जो तूने दिए
मैं मरहम लगाता कहाँ हूँ
इश्क के जोर में
जो तुमने हुस्न -ऐ – जहर पिलाया
मयखाने के जाम में
नशे में चूर होता कहाँ हूँ
खाके-सुपुर्द होने की चाहत में
तेरी याद में दफ़न होता कहाँ हूँ
तेरे बिना मैं जीता कहाँ हूँ
तेरे बिना मरता कहाँ हूँ
घर तो बनाया
मैंने तेरे दिल में
पर तेरे दिल में
मैं रहता कहाँ हूँ—-अभिषेक राजहंस

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/10/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 02/10/2017
  3. sarvajit singh sarvajit singh 02/10/2017

Leave a Reply