मेरी गजल- दर्द- ए -गजल

मेरी गजल–दर्द -ए- गजल
1
तेरे दिये दर्द को
सीने से लगा लेते है
जख्मो को कुरेद कर
हवा देते है
चुभन तेरी बेवफाई का
एहसास दिला देते हैं
2
तेरे सितम को सहते सहते
हम रात को तन्हा रोते हैं
नींद होती नहीं आँखों में
करवटो के दर्द में जीते है
हाथ में कांच पेवस्त कर
दर्द और भी बढ़ा लेते हैं
3
दर्द तूने जो दिए
उसे झुरियों से छिपा लेते हैं
तेरी बेवफाई का नशा
मयखाने में उतार देते हैं
कफ़न तेरे दर्द का ओढ़ कर
हम दुनिया छोड़ जाते है —
अभिषेक राजहंस

7 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/10/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 01/10/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/10/2017
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/10/2017
  5. sarvajit singh sarvajit singh 01/10/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 03/10/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/10/2017

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