छोड़ दो

रूह को ठेस पहुचे करना वो काम छोड़ दो,
पाबंद रहो वक़्त के,रहना ग़ुलाम छोड़ दो।

यू गफलतों में जीना भी कोई जीना है भला,
झूठी हँसी हसना सुबह-शाम,छोड़ दो।

एक गली की बात है गली गली तक जाएगी,
मुहब्बत यू करना सरे-आम,छोड़ दो।

ये मज़हब की आग है घर जला डालेगी,
इबादत कभी रहीम की तो जपना कभी राम,छोड़ दो।

चंद सिक्कों पर जिन्होंने शोहरत हासिल की है,
करना ऐसे लोगो को सलाम,छोड़ दो।

कहते है इश्क़ जिसे बहुत ही बुरी बला है,
इस कदर जागना राते तमाम,छोड़ दो।

ना बात कही गयी ना बात सुनी गई,
देना रिश्तों को ऐसा अंजाम,छोड़ दो।

बड़ा ही नाखुश होता है जब वाइज़ समझाता है मुझे,
शराब होती है हराम, छोड़ दो।

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/09/2017
    • दीपेश जोशी 28/09/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 28/09/2017
    • दीपेश जोशी 28/09/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 28/09/2017
    • दीपेश जोशी 28/09/2017
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 28/09/2017
    • दीपेश जोशी 28/09/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/09/2017
    • दीपेश जोशी 28/09/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/10/2017
    • दीपेश जोशी 02/10/2017

Leave a Reply