ऐ वक़्त

आहिस्ता-आहिस्ता चल ऐ वक़्त
जरा ज़िन्दगी को
सांस का इल्म तो करा
अतीत के साये
मोहब्बत में जो जख्म पाये
उन जख्मो पे मरहम तो लगा
आहिस्ता-आहिस्ता चल ऐ वक़्त
जरा बादलो की टंकार तो सुना
प्रिये के पायल की झंकार तो सुना
ज़िन्दगी को थकान तो दिखा
वो अधुरा बनाया मकान तो दिखा
ऐ वक़्त तू होता कहाँ है
तू मिलता कहाँ हैं
जरा सिद्दत से अपनी पहचान तो बता
तुझे खरीद लूँ मैं
जरा अपना दुकान तो दिखा–अभिषेक राजहंस

6 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 27/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 27/09/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 27/09/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/09/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 27/09/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/10/2017

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