मिलजुल कर रहा करों यारों

चार दिन की तो ये जिंदगी हैं,
क्यों नफ़रत पालते हो यारों।
हम पहले इंसान बनना तो सीख लें,
क्यों धर्म के नाम पर लड़ते हो यारों।
हमारे रास्ते अलग अलग हो सकते हैं,
पर उस ख़ुदा को तो मत बांटो यारों।
सुखबीर आपसे निवेदन करता है
मिलजुल कर रहा करों यारों।

8 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/09/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/09/2017
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 25/09/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 25/09/2017
  5. sarvajit singh sarvajit singh 25/09/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 26/09/2017
  7. Sukhbir95 26/09/2017
  8. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 26/09/2017

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