कुछ लफ्ज़

1. जिस्म का नही जनाब इस रूह का इम्तेहान लीजिए।

आंखें ये फरेबी हैं,आप जज्बातों का तकाजा कीजिये।।

2.लफ़्ज़ों की इस हेरा फेरी में सच को झूठ और झूठ को सच बना बैठे।

ज़िन्दगी को सर्कस तो सर्कस को ज़िन्दगी बना बैठे।।

3. दो और दो पांच होते हैं

बस नज़र भर का फर्क है

वरना कहाँ ज़िन्दगी के दो पहलू होते हैं?

4.यादें भी अजीब हैं

जितना हम समेटने की कोशिश करते हैं

उतना ही बिखरती नज़र आती हैं।

3 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/09/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 25/09/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 25/09/2017

Leave a Reply