जन्नत – सर्वजीत सिंह

जन्नत

राहों में भटक रहा था मैं तुमने मुझे सहारा दे दिया
मेरी डूबती हुई कश्ती को तुमने किनारा दे दिया

मोहब्बत करके जाना मैंने कितनी रोशन है जिंदगी
मेरे इस अंधियारे जीवन को तुमने उजियारा दे दिया

तुम्हारे आने से पहले दिल में कोई तमन्ना ही नहीं थी
तुमने आ कर जिंदगी जीने का तोहफा प्यारा दे दिया

हार चुका था मैं तो अपनी ही रूठी हुई किस्मत से
तुम्हारी मुस्कुराहट ने जीतने का जोश दोबारा दे दिया

तुम हो हमसफ़र तो और कोई ख्वाहिश नहीं सर्वजीत
लगता है ख़ुदा ने धरती पर जन्नत का नज़ारा दे दिया

सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

16 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/10/2017
  2. sarvajit singh sarvajit singh 08/10/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 08/10/2017
    • sarvajit singh sarvajit singh 08/10/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/10/2017
    • sarvajit singh sarvajit singh 08/10/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/10/2017
    • sarvajit singh sarvajit singh 08/10/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 09/10/2017
  7. sarvajit singh sarvajit singh 09/10/2017
  8. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 09/10/2017
    • sarvajit singh sarvajit singh 10/10/2017
  9. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 09/10/2017
    • sarvajit singh sarvajit singh 10/10/2017
  10. डी. के. निवातिया dknivatiya 12/10/2017
    • sarvajit singh sarvajit singh 13/10/2017

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