कल, आज और कल…

कल क्या था?

आज क्या है?

न जाने कल क्या होगा?

इस सवाल मे सदा ही हरपल

मानव जीवन बीतेगा।

किस वर्ष मे जंग लड़ी थी,

कब विजय की घोषणा की थी,

यह तो सभी को रटा होगा

पर क्या किसी को मालूम है

कि कितने निर्दोषों ने जान दी थी..?

फिरंगी आए व्यापारी बनकर

फैल गए महामारी बनकर

करी गुलामी हैवान बनकर

चले गए हमारा पतन कर कर।

अब लोट आए हैं व्यापार करने

बस गए हैं युवा पीढ़ी में

छा गए हैं हर कोने में

क्या फर्क बचा है

कल और आज मे?

एक फर्क पर सबसे बड़ा है

वृद्धों का सम्मान घटा है

महिलाओं को बढ़ावा मिला है

पर संग मे दुराचार बढ़ा है;

अब ना ही सीता-राम रह गए,

न कोई दानवीर कर्ण है;

अब तो बस कंस-दुर्योधन,

दिखते हर दर्पण मे है।

 

-निहारिका मोहन

14 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 21/09/2017
    • Niharika Mohan 21/09/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/09/2017
    • Niharika Mohan 21/09/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 21/09/2017
    • Niharika Mohan 21/09/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/09/2017
    • Niharika Mohan 21/09/2017
  5. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 21/09/2017
    • Niharika Mohan 21/09/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/09/2017
    • Niharika Mohan 22/09/2017
  7. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/09/2017
  8. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 25/09/2017

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