तस्वीर

शीर्षक–तस्वीर
समय के चादर से निकाली
वो तस्वीरो का अलबम
वो बचपन का किस्सा
वो ज़िन्दगी का हिस्सा
यादो का बगीचा
कुछ धुंधला सा
तस्वीर में कभी
आँखों का काजल ढूंढता
कभी पिताजी की पुरानी कमीज ढूंढता
कभी माँ की लाल चुरियाँ खोजता
तस्वीर संग
याद आती रिश्तों की सौगाते
खट्टी -मीठी बाते
तस्वीर संग याद आती
बचपन का नटखटपन
योवन का अल्हड़पन
तस्वीर संग याद आते
वो तारो वाली राते
और याद आते कुछ अपने
जिन्हें सिर्फ तस्वीर में ढूंढ पाते
अतीत ने जिन्हें
दफ़न कर लिया खुद में
तस्वीर देख
आती है उनकी यादें
भर आती है आँखे——अभिषेक राजहंस

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/09/2017
    • Abhishek Rajhans 19/09/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 19/09/2017
    • Abhishek Rajhans 19/09/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 19/09/2017

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