अधूरा रह गया- सोनू सहगम

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Sonu Sahgam

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-: अधूरा रह गया :-

गुजरे जमाने को मैं बस याद करके रह गया
वो मेरे घर आया और मैं बिन मिले ही रह गया

कहते है गूंजी थी बेबाक हंसी उसकी मेरे घर
और मैं बदनसीब उन्हे सुने बिना ही रह गया

चंद लफ्ज जो आए थे अधरों पर मेरे, कहने को
मौका था, था दस्तूर भी, मगर हाथ मलते रह गया

भेजा था पैगाम उसकी रेशम सी जुल्फ ने हवाओं से
कमबख्त झोका पवन का मुझ तक आते आते रह गया

बताया आईने ने मेरे कमरे के, कैसे वो सज कर आई
मैं दूर ही बस कल्पनाओं मे गोते लगता रह गया

सुना है खफा है वो मुझसे, ना मेरे मिलने पर
उसे क्या पता मेरे चंद का दीदार अधूरा रह गया

*सोनू सहगम*

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/09/2017
  2. रणदीप चौधरी 'भरतपुरिया' Randeep Choudhary 16/09/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/09/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/09/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 16/09/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/09/2017

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