मैं जी लूँ

कितनी याद तेरी आती है
इक तस्वीर सी बन जाती हैं
मैं तेरी साँसों में जीता हूँ
ख्वाबो में खोया रहता हूँ
कश्तियों की निगाह से
समंदर को तका करता हूँ
ज़िन्दगी के इन सफों पर
तेरा रंग भरता हूँ
तेरी याद में जीता मरता हूँ।
कितनी याद तेरी आती है
इक तस्वीर सी बन जाती हैं
वक़्त से कहता हूँ
तू पीछे लौट चल
मैं जी लूँ
आज फिर से वो पल
वो सुहाने दिन
वो मौज भरी रातें
वक़्त पीछे लौटता नहीं
तेरी यादो के सिवा कुछ होता नहीं
अब तो जीता ही नहीं
बस साँसे चला करती है
और साथ में
घड़ी की टिक-टिक करती सूइयाँ
अब तेरी यादें ही हैं सौगाते
होती है मौला से शिकायते
मैं जीता था तुमको
अब होती है तेरी यादें—अभिषेक राजहंस

5 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 15/09/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/09/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 15/09/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/09/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/09/2017

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