आराम चाहिए – मनुराज वार्ष्णेय

नबाबों का साथ , लोगों का सलाम चाहिए
चैन की नींद , दिन भर का आराम चाहिए

थक गया हूँ दुनिया की भागदौड़ से
मुफ्त में मिले ऐसा कोई काम चाहिए

आंखों में आँसू , सीने में दर्द भरा है
मेरी रूह को भी एक जाम चाहिए

ये तन्हाई मुझे हर तरीके से ढूंढ लेती है
अब तो मेरी पहचान को भी नया नाम चाहिए

ए ख़ुदा तू अब मेरा हिसाब कर दे
दर्द की तरह , खुशियाँ भी तमाम चाहिए

जो लुट गयी मेरी खुशियां बेमोल ही
मुझे हर एक का पूरा दाम चाहिए

सुनाऊंगा फिर कभी किस्से अकेलेपन के
इसके लिए भी एक लंबी शाम चाहिए

2 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 15/09/2017

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