जिस रात उस गली में

रौशनी में खो गयी कुछ बात जिस गली में
वो चाँद ढूढ़ने गया जिस रात उस गली में ||

आज झगड़ रहे है आपस में कुछ लुटेरे
कुछ जोगी गुजरे थे एक साथ उस गली में ||

कुछ चिरागो ने जहाँ अपनी रौशनी खो दी
क्यों ढूढ़ता है पागल कयनात उस गली में ||

मौसम बदलते होंगे तुम्हारे शहर में लेकिन
रहती है आँशुओं की बरसात उस गली में ||

सूरज को भी ग्रहण लगता है हर एक साल
बदलेंगे एक दिन जरूर हालात उस गली में ||

5 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 14/09/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/09/2017
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/09/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/09/2017

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