प्रद्युम्न मेरा नही पूरे देश का बेटा है !!

ये शब्द प्रद्युम्न के माँ ने कहा और इसे सुनने के बाद रोंगटे खड़े हो गये और मन भावुक हो गया ! आंसू छलक ही गये !! सोचकर भी रूह कांपता है !! अभिभावक के अनुसार बच्चे ने कुछ ऐसा देख लिया होगा टॉयलेट के आस-पास जो समाज में गलत कहा जाता है !! उसे आप बेहतर समझ सकते है और मै अभिभावक के इस विचार से सहमत भी हूँ !! इसका कारण मेरा खुद का अनुभव है – दिल्ली के चिल्ला विलेज के स्कूल में एक इंटरनेट डिबेट प्रतियोगिता के समय वर्ष २०१३ में महिला टीचर को वहां के विद्यार्थी के साथ फ़्लर्ट करते हुए देखा था !! वहां की मुखतः अध्यापिका अपनी छन्नी वाली साड़ी पहनकर फैशन शो में भाग लेने के भांति के अंदाज से ऐसे चलती जैसे रैंप वाक करने का इरादा हो !! ये कोई एक स्कूल की कहानी नही है बल्कि लगभग अधिकांश प्राइवेट स्कूल का यही हाल है ! सेंत,परफ्यूम लगाकर शोर्ट,कट वाले वस्त्र पहनकर स्कूल में शिक्षिका को शिक्षिका के नजर से कैसे कोई देख सकेगा !! युवा विद्यार्थी के मुंह से तारीफ को सुनने की लालसी और जेंट्स टीचर के आँख को रोज सुकून पहुँचाने की दृष्टि से ये अति आवश्यक हो जाता है !! अपने अंगो को प्रदर्शित करके रोज तारीफ सुनना ये सब आप इंडियन सभ्यता के अंतर्गत देख ही सकते है और मैक्ले के मानस पुत्रो द्वारा स्थापित असभ्य शिक्षा व्यवस्था का उए बेहतरीन उदाहरण भी है !! अब वहां पर प्रद्युम्न ने जरुर कोई जेंट्स टीचर को देखा होगा क्योंकि जो कंडक्टर रोजाना बच्चो को स्कूल से घर और घर से स्कूल लाये वो कैसे किसी बच्चे की गला काटकर हत्या कर सकता है ये मेरे समझ से बाहर है !! मै ये नही मान सकता !! ज्योतिष बुद्धि भी ये नही मान रही क्योंकि बेगुनाह व्यक्ति इतनी आसानी से टीवी पर अपना गुनाह नही कबूल सकता और अभिभावक सहित पूरे दर्शक और जिन्हें भी इस मामले का पता है वो भी कंडक्टर को दोषी नही मान रहे है !! ये एक तरीका है हत्यारे को समय देने की ताकि वो अपना बोरा बिसतर लेकर भाग सके आसानी से और क्योंकि कंडक्टर ने जुर्म किया ही नही है तो भागने के बाद वो कह सकता है मैंने ये नही किया ! मुझे पैसे दिए गये थे !! डराया गया था !! जो आप अनुमान लगा सकते है !!!

इसके बाद स्कूल के पास २७ कदम की दूरी पर शराब के ठेके को जला दिया गया !! मेरा तो यही आह्वान है सभी अभिभावकों से कि स्कूल की व्यवस्था और सुरक्षा,शिक्षा का लिखित ब्यौरा मांगे और जिम्मेदारी मांगे ताकि आगामी भविष्य में ऐसी कोई घटना नही हो सके !!
फैशन का जलवा नही एक विचार को बढ़ावा दिया जा रहा है ! एक सोच को कि मॉडर्न बनो, आधुनिक बनो और उस आधुनिकता में लोग नंगा होना शुरू कर रहे है और अपनी आँखों से बलात्कार करने वाले बेशर्म उसको बढ़ावा और उसपर प्रशंसा के फसीदे कस रहे है !! ये मेरे कॉलेज में भी होता था और कई जगह होता भी है ! कपड़े पहनने की आजादी है !! देश आजाद है ! मै कुछ भी पहनूं ! ऐसे जवाब किसी मैक्ले के विचार वंशज की देन है जिसका वो नाम रोशन कर रही है !! कोशिश करे फ़िल्मी,टीवी के ग्लैमर को कॉपी न करने की क्योंकि स्त्रियों,लड़कियों का आभूषण उसका अंग नही उसका स्वाभिमान,मर्यादा,व्यवहार,गुण व् संस्कार है !! अंग का रंग,अंग का प्रदर्शन उन लोगों की परिभाषा है जो आपको इसमें सम्मान और प्रशंसा की बात बताकर अपनी आँखों से बलात्कार करके अपनी हवस बुझाते है !! स्कूल टाइम से लेकर कॉलेज और मार्किट एरिया तक ऐसे कई युवा मिलेंगे जो इसे आजादी की परिभाषा बताते है क्योंकि रोज ऐसे चीज देखने के आदि अब उन्हें मोबाइल से जाकर लाइव,प्रैक्टिकल करने में ये सब मजा आता है !! ये सारी बाते ऐसी है जो सब जानते है पर शर्म के मारे लिखने से कतराते है पर ये सच है और अटल है !! हमारे संस्कार और सोचने के तरीके पर आघार अप्रत्यक्ष रूप से इन्ही फ़िल्मी,टीवी सीरियल,अश्लील पोस्टर और इंटरनेट के दुरुपयोग का परिणाम है !! जब तक अभिभावक ये सोचकर पीछे हटेंगे कि छोड़ो इसके किस्मत में यही लिखा था य सबके साथ थोड़ी न होगा तो मेरी बात जान लीजिये !! जब आपके साथ ऐसा हो तो मत सोचना कोई क्यों नही मेरा साथ आगे आया !! अपने बच्चो को स्कूल में पढ़ाने वाले एक यूनियन बनाये जो कि स्कूल मैनेजमेंट को आड़े हाथो ले सके और उसपर दबाव बना सके ! पूरे भारत में रयान इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य से ये लिखित ब्यौरा और विश्वासपत्र माँगा जाये कि हमारे बच्चे के साथ कुछ भी होता है उसकी जिम्मेदारी आप की होगी !! लिखित इसीलिए बोल रहा हूँ क्योंकि लिखित का भार कानून में ज्यादा होता है !!
अब आपको बस इतना ही कह सकता हूँ कि कुछ टीवी मीडिया और पुलिस वाले ऐसे पापी है एक पैसा खाकर खबरे दबाते है दूसरे पैसा लेकर दोषी छिपाते है !! जब तक आप जागोगे नही तब तक ये हमारा शोषण ऐसे ही करते रहेंगे !! कोशिश करे कि विरोध वैचारिक हो क्योंकि आज वैचारिक क्रांति की सख्त आवश्यकता है !!

जयश्रीराम

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/09/2017
  2. C.M. Sharma babucm 12/09/2017
  3. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 13/09/2017